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खोलकर दुकान अपनी, करता तू किसका इंतज़ार है? रास्ता बाज़ार का है, यहाँ ख़रीददार गुजरते हैं.. ©डॉ. सुनील
कुछ व्यक्ति विरोध करने के लिए ही जन्म लेते हैं। उनको कुछ मुफ्त में देंगे तो लेते जाएंगे और सोचते रहेंगे कि मुफ्त में कोई क्यों देगा? कहीं जहर तो नहीं दे रहे हैं? फिर हल्ला करेंगे कि अरे मार डाला, मार डाला। कम मूल्य पर देंगे तो सोचेंगे, दाम इतने कम क्यों? कहीं मिलावट तो नहीं है? फिर हल्ला कर देंगे सामान मिलावटी है। ज्यादा मूल्य लिया तो सोचेंगे, अरे! इतना ज्यादा? हल्ला कर देंगे लूट हो रही है। यह कभी नहीं सोचेगा कि उसकी ही बुद्धि भ्रष्ट है। वस्तु का अपना कोई मूल्य नहीं होता है। जितने गुण होते हैं, वस्तु उतनी ही महँगी मिलती है। ★डॉ. सुनील जय श्री कृष्ण!