Ramayan
रामायण के पात्र के रूप में जब राम पर विचार करते हैं तो मन में एक असंतोष उपजता है। एक स्त्री कैकेयी दूसरी स्त्री मंथरा की कुटिल मंत्रणा से उन्हें वन भेजती है। तीसरी स्त्री शूर्पणखा वन में उनके पत्नी वियोग का कारण बनती है। दशरथ राम को वनवास देने के लिए वचनबद्ध नहीं थे जैसे युधिष्ठिर द्रौपदी को दाँव पर लगाने के अधिकारी नहीं थे। दशरथ ने बिना उचित अनुचित विचार किए कैकेयी को वचन दिया तो राम ने भी धोबी की बातों में आकर सीता को वन भेज दिया। क्या राम, दशरथ के समान सीता को वन भेजने के लिए किसी के प्रति वचनबद्ध थे। पहले वनवास में सीता ने राम का साथ दिया तो दूसरे वनवास में सीता का साथ किसी ने क्यों नहीं दिया जबकि वह गर्भवती थी। रामायण राम के वनवास पर टिकी है तो सीता के वनवास पर भी दूसरी रामायण लिखी जानी चाहिए थी। वह मर्यादाओं का युग था, मेघनाद और कुम्भकर्ण ने भी पिता और भाई के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। त्याग के आगे दूसरे युग में अधिकारों के लिए कुरुक्षेत्र का आयोजन होता है। मुझे राम और कृष्ण समान रूप से प्रिय हैं यद्यपि दोनों में एक बड़ा भेद है मिलता है। राम मर्यादा के लिए भक्त को छोड...