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वस्तु में मूल्य समय भरता है.. बिना काल पदार्थ का कोई महत्त्व नहीं, प्यासे के लिए जल और भूखे के लिए रोटी.. महत्त्व जल और रोटी का नहीं बल्कि प्यास और भूख का है.. जल में कौन आनंद उत्पन्न करता है या रोटी में कौन स्वाद लाता है, प्यास और भूख.. प्यास ही न हो और जल सुलभ हो तो जल को कौन आदर देता है, बह जाए.. भूख न होने पर रोटी को कौन देखता है.. आम स्वादिष्ट फल है, फलों का राजा, लेकिन स्वाद तो अपने मौसम में ही देता है.. सर्दियों में कौन खरबूज- ककड़ी खाने की इच्छा करता है.. जैसे प्रकृति पदार्थ में स्वाद भरती है ठीक वैसे ग्रहीय-गोचर व्यक्ति के जीवन में रंग भर देते हैं.. ♥डॉ. सुनील जय श्री कृष्ण! ★मामा जिसके हरि स्वयं, पिता धनंजय ख्यात, वह अभिमन्यु रण में मरे, भाग्य बली है तात.. https://m.facebook.com/jai.hanuman.50115

PCS 2017

PCS 2017 परीक्षा 24 सितम्बर को प्रस्तावित है.. बाजार किताबों- नोट्स इत्यादि से ऐसे सज गया है जैसे दीवाली पर दुकाने पटाखों से सज जाती हैं.. हर प्रकार के बम-तमंचे की तरह किताबें उपलब्ध हैं, समसामयिकी पर ही हजार से ज्यादा मैगज़ीन बिक रही हैं.. छात्र के लिए न कुछ छोड़ते बनता है और न कुछ पढ़ते, आखिर मस्तिष्क की भी अपनी मेमोरी है.. किसी की mb में है तो किसी की gb में, मेरी सलाह है कि जो करना है सीमा में रहकर करो क्योंकि मेमोरी के ऊपर गए तो हैंग हो जाओगे.. परीक्षा है, कोई हौआ नहीं.. ♥डॉ. सुनील जय श्री कृष्ण! https://m.facebook.com/jai.hanuman.50115

Baba Gurumeet Rapist!!

दौलत,शोहरत और ताकत का भरा खज़ाना छोड़ कर पापी गुरुमीत आज जेल में है.. न राम हुआ, न रहीम हुआ.. वो गुरुमीत था,  बलात्कारी हुआ.. ♥डॉ. सुनील जय श्री कृष्ण! नोट - बाबा किसी ज्योतिषी के संपर्क में होता तो बच जाता क्योंकि यश-अपयश गोचर से मिलता है, यद्यपि कुंडली में नीच का शुक्र पाप ग्रहों के प्रभाव से कलंक अवश्य देता है लेकिन समय रहते यथोचित उपचार से राहत मिल जाती है..  ★संभोग में कोई बुराई नहीं है.. संभोग मानसिक अवसाद से दूर रहने का एक अच्छा उपाय है लेकिन धर्म को  संभोग का माध्यम नहीं बनाना चाहिए.. ★भीड़ ने एक बलात्कारी बाबा के लिए हिंसा नहीं की, एक भय है कि अगर बाबा नहीं होगा तो उनको रास्ता कौन दिखाएगा.. अनुयायी कभी नहीं मानेंगे कि उनके बाबा ने बलात्कार भी किया होगा,    अच्छे लोगों का या उनकी बातों का प्रचार होता नहीं है, तो भीड़ ऐसे ही बाबाओं के पीछे चल पड़ती है..

Children's duty! Children's right!

ज्यों ज्यों संतानों की संख्या बढ़ती है ,  संतानों के प्रति जनकों के अधिकार कम और कर्तव्य अधिक बढ़ते हैं.. बाद की संतानें अपनी उत्पत्ति के लिए दोष दे सकती हैं कि अगर आप हमें सुख नहीं दे सकते थे तो इस दुःखमय संसार में क्यों लाए.. बाद की संतानें माता-पिता के अधिकार कम दायित्व अधिक होती हैं.. ©डॉ. सुनील जय श्री कृष्ण!

tin talak, talak, Freedom, islam

औरत किसी संप्रदाय की नहीं होती, सभी धर्मों में महिलाओं को मासिक आता है और इस प्रकार संतानोत्पत्ति उनका प्राथमिक और मूल गुण है.. इस्लाम में महिलाओं को मर्दों की जमीन समझा जाता है..जब  तक मन हुआ रखा और फिर छोड़ दिया, छोड़ने के लिए भी कुछ खास नहीं करना है.. एक शब्द तीन बार बोलना भर है और मर्द को नई औरत से खेलने की आजादी मिल गई.. सुप्रीम कोर्ट ने तलाक ए बिद्दत को असंवैधानिक कहा है लेकिन इसने इस्लाम के उस गढ़ में सेंध लगा दी है जिसके बल पर भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश में रहकर भी एक संप्रदाय अपनी कट्टरता में जीवित था, महिलाएँ तलाक से ही मुक्त नहीं हुईं.. अब वो इस्लाम से भी मुक्त होंगी.. तीन तलाक नहीं तो खतना भी क्यों होगा.. आखिर खतना भी तो ज्यादा से ज्यादा बीबियों को रखने के लिए किया जाता है.. बुर्का भी फटेगा, एक नई औरत बाहर आयेगी.. इस्लाम से आजाद, मुल्लों से मुक्त.. ©डॉ. सुनील