संदेश

निकिता

मुल्ले तो हिंदू लड़कियों के पीछे ही पड़ गए हैं। हरियाणा में बीकॉम अंतिम वर्ष की छात्रा #निकिता की एक मुल्ले ने कॉलेज के सामने ही गोली मारकर हत्या कर दी जब वह अपना अंतिम पेपर देकर लौट रही थी। हत्याकांड के सीसीटीवी फुटेज में दिखाई पड़ता है कि निकिता अपनी जान बचाने के लिए अपनी सहेली के पीछे भी छिपती हैं लेकिन मुल्ला #तौसीफ उसे खींचकर गोली मार देता है। गोली मारने के बाद मुल्ला तौसीफ अपने साथी #रेहान के साथ जिस तेजी से भागता है उससे पता चलता है कि उसे अपने जीवन से कितना प्यार है। उसने यह क्यों नहीं सोचा कि निकिता को अपने जीवन से प्यार रहा होगा। कोई धर्म परिवर्तन नहीं करेगा तो तुम उसे मार दोगे? निकिता को जैसे मारा गया है उसे देखकर हृदय करुणा से भर गया है। मुसलमानों ने अपनी लड़कियों को बुरके में हिफाजत से रखा हुआ है और उनके लड़के हिंदू लड़कियों के पीछे लग गए हैं। ईश्वर #निकिता की आत्मा को शांति प्रदान करे और मुल्ले तौसीफ को जल्द से जल्द फाँसी पर लटकाए। जय श्री कृष्ण!

Ramayan

रामायण के पात्र के रूप में जब राम पर विचार करते हैं तो मन में एक असंतोष उपजता है। एक स्त्री कैकेयी दूसरी स्त्री मंथरा की कुटिल मंत्रणा से उन्हें वन भेजती है। तीसरी स्त्री शूर्पणखा वन में उनके पत्नी वियोग का कारण बनती है। दशरथ राम को वनवास देने के लिए वचनबद्ध नहीं थे जैसे युधिष्ठिर द्रौपदी को दाँव पर लगाने के अधिकारी नहीं थे। दशरथ ने बिना उचित अनुचित विचार किए कैकेयी को वचन दिया तो राम ने भी धोबी की बातों में आकर सीता को वन भेज दिया। क्या राम, दशरथ के समान सीता को वन भेजने के लिए किसी के प्रति वचनबद्ध थे। पहले वनवास में सीता ने राम का साथ दिया तो दूसरे वनवास में सीता का साथ किसी ने क्यों नहीं दिया जबकि वह गर्भवती थी। रामायण राम के वनवास पर टिकी है तो सीता के वनवास पर भी दूसरी रामायण लिखी जानी चाहिए थी। वह मर्यादाओं का युग था, मेघनाद और कुम्भकर्ण ने भी पिता और भाई के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। त्याग के आगे दूसरे युग में अधिकारों के लिए कुरुक्षेत्र का आयोजन होता है। मुझे राम और कृष्ण समान रूप से प्रिय हैं यद्यपि दोनों में एक बड़ा भेद है मिलता है। राम मर्यादा के लिए भक्त को छोड...

CORONA EFFECTS

विक्रमी संवत 2077 के राजा बुध और मंत्री चंद्रमा हैं। बुध के लिए सजलं महीतलं गृहे गृहे तूर्यविवाहमंगलम् प्रकुर्वते विप्रसुरार्चनं नराः सौख्यं सुभिक्षं धनधान्यसंकुलम्  और चंद्रमा के लिए बहुसस्यवत्यपि धरा रमते सुखमण्डिता वियति वारिधरा बहुवर्षिणो जनपदाः सुखराशिसुशोभिताः बताया गया है। जहाँ तक पंचांग की बात है वह सामान्य ग्रह गणनाओं पर बने होने के साथ प्रकृति के साथ हमारे जुड़ाव को दिखाते हैं। मार्च-अप्रैल में मौसम परिवर्तन के चलते ठंडी-गर्मी होती है जिससे वातावरण में विषाणुओं की संख्या बढ़ती है। इन्ही महीनों में पहले चेचक (बड़ी माता) फैलती थी। छोटी माता (चिकनपॉक्स) का विषाणु वैरिकाला जोस्टर भी इस समय सक्रिय होता है इसलिए पंचांग में वर्ष के इन महीनों में विषाणुजनित रोगों को लेकर लिखा मिलता है। होली के बाद नवदुर्गा भी इसलिए रखे गए हैं जिससे उपवास रखने से शारीरिक शुद्धि बनी रहे। आम अधिक खाने पर जामुन काम करता है और प्रकृति में दोनों एक साथ ही आते हैं। शास्त्र प्राकृतिक आपदाओं को राजा के विधर्मी होने से जोड़ते हैं और शमन हेतु राजा को हटाने का विधान करते हैं। आपदा स्थानीय हो अथवा प्रादेशिक...
चोपड़ा के धारावाहिक महाभारत में भीष्म का किरदार निभाने वाले मुकेश खन्ना यूट्यूब पर अपने विचार डालते रहते हैं। भीष्म ने तो एक बार प्रतिज्ञा की और जीवन भर उस पर अफ़सोस किया या उनमें शक्ति नहीं थी कि वह अपनी प्रतिज्ञा तोड़कर समाज की रक्षा करते क्योंकि कुरुक्षेत्र में मात्र कोई पारिवारिक विवाद का समाधान नहीं हुआ बल्कि एक सभ्यता पूरी तरह से नष्ट हो गई। मुकेश खन्ना आजकल राजीव दीक्षित पर बोल रहे हैं। राजीव दीक्षित ने अच्छे उपाय दिए हैं किंतु आपातकाल में उनके भरोसे रहे तो विपत्ति बढ़ना तय है। अपनी उसी पोस्ट को यहाँ लिख रहे हैं जिससे समझ बढ़े। ***निस्संदेह नब्बे के दशक जैसा महाभारत अब बन पाना संभव नहीं है। इसका एक कारण यह था कि धारावाहिक के सभी पात्र अपने अभिनय के प्रति ईमानदार और समर्पित थे। अगर मुकेश खन्ना ने भीष्म के किरदार में प्राण फूँक दिए तो बाकी अभिनेता भी एक से बढ़कर एक रहे। फिरोज खान अर्जुन लगता है और नितीश भारद्वाज पूरी तरह से कृष्ण रूप में दिखाई पड़ते हैं। दूसरा कारण यह है कि वह समय अलग था। लोग सीधे थे और अपने काम से मतलब रखते थे। कह सकते हैं कि लोगों के पास टीवी देखने के लिए पर्याप्त ...
मंजिल मिल जाएगी शाम तक मगर, बताने को किस्से सफ़र के रहेंगे.. ©डॉ. सुनील
खोलकर दुकान अपनी, करता तू किसका इंतज़ार है? रास्ता बाज़ार का है, यहाँ ख़रीददार गुजरते हैं.. ©डॉ. सुनील
कुछ व्यक्ति विरोध करने के लिए ही जन्म लेते हैं। उनको कुछ मुफ्त में देंगे तो लेते जाएंगे और सोचते रहेंगे कि मुफ्त में कोई क्यों देगा? कहीं जहर तो नहीं दे रहे हैं? फिर हल्ला करेंगे कि अरे मार डाला, मार डाला। कम मूल्य पर देंगे तो सोचेंगे, दाम इतने कम क्यों? कहीं मिलावट तो नहीं है? फिर हल्ला कर देंगे सामान मिलावटी है। ज्यादा मूल्य लिया तो सोचेंगे, अरे! इतना ज्यादा? हल्ला कर देंगे लूट हो रही है। यह कभी नहीं सोचेगा कि उसकी ही बुद्धि भ्रष्ट है। वस्तु का अपना कोई मूल्य नहीं होता है। जितने गुण होते हैं, वस्तु उतनी ही महँगी मिलती है। ★डॉ. सुनील जय श्री कृष्ण!