चोपड़ा के धारावाहिक महाभारत में भीष्म का किरदार निभाने वाले मुकेश खन्ना यूट्यूब पर अपने विचार डालते रहते हैं। भीष्म ने तो एक बार प्रतिज्ञा की और जीवन भर उस पर अफ़सोस किया या उनमें शक्ति नहीं थी कि वह अपनी प्रतिज्ञा तोड़कर समाज की रक्षा करते क्योंकि कुरुक्षेत्र में मात्र कोई पारिवारिक विवाद का समाधान नहीं हुआ बल्कि एक सभ्यता पूरी तरह से नष्ट हो गई। मुकेश खन्ना आजकल राजीव दीक्षित पर बोल रहे हैं। राजीव दीक्षित ने अच्छे उपाय दिए हैं किंतु आपातकाल में उनके भरोसे रहे तो विपत्ति बढ़ना तय है।
अपनी उसी पोस्ट को यहाँ लिख रहे हैं जिससे समझ बढ़े।
***निस्संदेह नब्बे के दशक जैसा महाभारत अब बन पाना संभव नहीं है। इसका एक कारण यह था कि धारावाहिक के सभी पात्र अपने अभिनय के प्रति ईमानदार और समर्पित थे। अगर मुकेश खन्ना ने भीष्म के किरदार में प्राण फूँक दिए तो बाकी अभिनेता भी एक से बढ़कर एक रहे। फिरोज खान अर्जुन लगता है और नितीश भारद्वाज पूरी तरह से कृष्ण रूप में दिखाई पड़ते हैं। दूसरा कारण यह है कि वह समय अलग था। लोग सीधे थे और अपने काम से मतलब रखते थे।
कह सकते हैं कि लोगों के पास टीवी देखने के लिए पर्याप्त समय हुआ करता था। समय इतना था कि कॉमिक्स भी खूब पढ़ी जाती थी। भीष्म प्रतिज्ञा पर हमने अपनी वॉल पर एक पोस्ट लिखी है जिसे आपको देखना चाहिए। उसमें बताया गया है कि प्रतिज्ञा करने के बाद आपके पास जीवन में नया करने के लिए क्या रह जाता है। जीवन परिवर्तनशील है। बदलते समय को आप एक समय विशेष पर की गई प्रतिज्ञा से कैसे साधेंगे। पिता के प्रति समर्पण आवश्यक है किंतु भीष्म ने अपनी प्रतिज्ञा में पिता को राष्ट्र का पर्याय बना दिया और फिर आजीवन सुयोग्य उत्तराधिकारी के अभाव में रोते रहे।
सत्यवती के पिता ने एक नवयुवक को बहका दिया और नवयुवक उत्साह में इतना आगे बढ़ गया कि उसने पितृ धर्म को राजधर्म पर वरीयता दे डाली। नवयुवक जड़ बुद्धि का था अन्यथा माता सत्यवती के कहने पर उसे अपनी प्रतिज्ञा पर पुनर्विचार अवश्य करना चाहिए था।
प्रतिज्ञा करना अच्छा है किंतु जड़ होकर उससे बँध जाना गलत है। प्रतिज्ञा कृष्ण ने भी की थी कि शस्त्र नहीं उठाऊँगा किंतु परिस्थितियों को देखकर उन्होंने उसे भंग कर दिया।
भीष्म नासमझी कर बैठा अन्यथा जिन राजकन्याओं को विचित्रवीर्य के लिए लाया था उनसे स्वयं उसका विवाह हुआ होता या विचित्रवीर्य न रहने पर माता सत्यवती की आज्ञानुसार उनसे राज्य के उत्तराधिकारी को जन्म दिया होता। ऐसा होने पर अंधा धृतराष्ट्र और उसके सौ कपूत जन्म ही नहीं ले पाते। महाभारत के लिए कहीं न कहीं भीष्म उत्तरदायी रहा और इसलिए उसे अपनी प्रतिज्ञा का परिणाम कुरुक्षेत्र में बाणों की शय्या के रूप में मिला।
***राजीव दीक्षित की सभी बातें सही नहीं हैं। उनको अपने अनुसार ही प्रयोग करें। जैसे उन्होंने सर्पदंश के लिए नाजा को बताते हुए कहा है कि इसे दुनिया के सबसे विषैले साँप के जहर से बनाया गया है और साँप के काटने पर व्यक्ति इससे सही हो जाता है। यह गलत है। नाजा को कोबरा या नागराज के जहर से बनाया गया है और वह उसी के जहर को काटती है। दुनिया के सबसे विषैले साँप रसेल वाइपर या किरैत का इलाज नाजा से करोगे तो जान से जाओगे।
इसी प्रकार एक वीडियो में राजीव दीक्षित कहते हैं कि तुलसी ऐसा पौधा है जिसे साल में कभी भी उगा सकते हैं जबकि ऐसा नहीं है। तुलसी का बीज भले किसी महीने में आप जमीन में डाल दो लेकिन पौधा उससे सावन महीने में ही निकलेगा।
डॉ. सुनील
जय श्री कृष्ण!

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