CORONA EFFECTS


विक्रमी संवत 2077 के राजा बुध और मंत्री चंद्रमा हैं।
बुध के लिए सजलं महीतलं गृहे गृहे तूर्यविवाहमंगलम् प्रकुर्वते विप्रसुरार्चनं नराः सौख्यं सुभिक्षं धनधान्यसंकुलम्  और चंद्रमा के लिए बहुसस्यवत्यपि धरा रमते सुखमण्डिता वियति वारिधरा बहुवर्षिणो जनपदाः सुखराशिसुशोभिताः बताया गया है।
जहाँ तक पंचांग की बात है वह सामान्य ग्रह गणनाओं पर बने होने के साथ प्रकृति के साथ हमारे जुड़ाव को दिखाते हैं। मार्च-अप्रैल में मौसम परिवर्तन के चलते ठंडी-गर्मी होती है जिससे वातावरण में विषाणुओं की संख्या बढ़ती है। इन्ही महीनों में पहले चेचक (बड़ी माता) फैलती थी। छोटी माता (चिकनपॉक्स) का विषाणु वैरिकाला जोस्टर भी इस समय सक्रिय होता है इसलिए पंचांग में वर्ष के इन महीनों में विषाणुजनित रोगों को लेकर लिखा मिलता है। होली के बाद नवदुर्गा भी इसलिए रखे गए हैं जिससे उपवास रखने से शारीरिक शुद्धि बनी रहे।
आम अधिक खाने पर जामुन काम करता है और प्रकृति में दोनों एक साथ ही आते हैं। शास्त्र प्राकृतिक आपदाओं को राजा के विधर्मी होने से जोड़ते हैं और शमन हेतु राजा को हटाने का विधान करते हैं। आपदा स्थानीय हो अथवा प्रादेशिक सभी को समान रूप से प्रभावित नहीं करती है। अतिवृष्टिऔर अनावृष्टि का परिणाम किसानों पर एक समान नहीं होता है। कहीं फसल नष्ट होती है तो कोई उसी समय लाभ कमाता है। व्यक्ति एक है किंतु उसका स्वभाव सभी के साथ एक जैसा नहीं मिलता है इसलिए कोरोना से संबंध समझने में व्यक्ति की उसकी कुंडली ही सहायता करेगी। बली लग्नेश व्यक्ति को शारीरिक व्याधियों से मुक्त रहता है। चंद्रमा के साथ गुरु का संयोग अवसाद मुक्त रखता है। इसी प्रकार अन्य बातों को जानना चाहिए किंतु ज्योतिषीय पुस्तकें पढ़ने से प्रेडिक्शन करने की क्षमता नहीं आती है। प्रेडिक्शन वही कर सकता है जिसकी अपनी कुंडली में प्रेडिक्शन करने का योग बना हो। यह कारण है कि विश्वविद्यालय में ज्योतिष पढ़ाने वाले और ज्योतिष की दुकानें चलाने वाले प्रेडिक्शन करते समय शून्य में भटक जाते हैं।
डॉ. सुनील
पी-एच.डी., यूजीसी (नेट)
"भद्रमहापुरुष'' "गजकेसरी" "नीचभंग राजयोग"

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