वस्तु में मूल्य समय भरता है..
बिना काल पदार्थ का कोई महत्त्व नहीं,
प्यासे के लिए जल और भूखे के लिए रोटी..
महत्त्व जल और रोटी का नहीं बल्कि
प्यास और भूख का है..
जल में कौन आनंद उत्पन्न करता है या
रोटी में कौन स्वाद लाता है,
प्यास और भूख..
प्यास ही न हो और जल सुलभ हो तो जल को कौन आदर देता है, बह जाए..
भूख न होने पर रोटी को कौन देखता है..
आम स्वादिष्ट फल है, फलों का राजा,
लेकिन स्वाद तो अपने मौसम में ही देता है..
सर्दियों में कौन खरबूज- ककड़ी खाने की इच्छा करता है.. जैसे प्रकृति पदार्थ में स्वाद भरती है ठीक वैसे
ग्रहीय-गोचर व्यक्ति के जीवन में रंग भर देते हैं..
♥डॉ. सुनील
जय श्री कृष्ण!
★मामा जिसके हरि स्वयं, पिता धनंजय ख्यात,
वह अभिमन्यु रण में मरे, भाग्य बली है तात..
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