tin talak, talak, Freedom, islam
औरत किसी संप्रदाय की नहीं होती,
सभी धर्मों में महिलाओं को मासिक आता है और इस प्रकार संतानोत्पत्ति उनका प्राथमिक और मूल गुण है..
इस्लाम में महिलाओं को मर्दों की जमीन समझा जाता है..जब तक मन हुआ रखा और फिर छोड़ दिया,
छोड़ने के लिए भी कुछ खास नहीं करना है..
एक शब्द तीन बार बोलना भर है और
मर्द को नई औरत से खेलने की आजादी मिल गई..
सुप्रीम कोर्ट ने तलाक ए बिद्दत को असंवैधानिक कहा है लेकिन इसने इस्लाम के उस गढ़ में सेंध लगा दी है जिसके बल पर भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश में रहकर भी एक संप्रदाय अपनी कट्टरता में जीवित था,
महिलाएँ तलाक से ही मुक्त नहीं हुईं..
अब वो इस्लाम से भी मुक्त होंगी..
तीन तलाक नहीं तो
खतना भी क्यों होगा..
आखिर खतना भी तो ज्यादा से ज्यादा बीबियों को रखने के लिए किया जाता है..
बुर्का भी फटेगा,
एक नई औरत बाहर आयेगी..
इस्लाम से आजाद,
मुल्लों से मुक्त..
©डॉ. सुनील
सभी धर्मों में महिलाओं को मासिक आता है और इस प्रकार संतानोत्पत्ति उनका प्राथमिक और मूल गुण है..
इस्लाम में महिलाओं को मर्दों की जमीन समझा जाता है..जब तक मन हुआ रखा और फिर छोड़ दिया,
छोड़ने के लिए भी कुछ खास नहीं करना है..
एक शब्द तीन बार बोलना भर है और
मर्द को नई औरत से खेलने की आजादी मिल गई..
सुप्रीम कोर्ट ने तलाक ए बिद्दत को असंवैधानिक कहा है लेकिन इसने इस्लाम के उस गढ़ में सेंध लगा दी है जिसके बल पर भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश में रहकर भी एक संप्रदाय अपनी कट्टरता में जीवित था,
महिलाएँ तलाक से ही मुक्त नहीं हुईं..
अब वो इस्लाम से भी मुक्त होंगी..
तीन तलाक नहीं तो
खतना भी क्यों होगा..
आखिर खतना भी तो ज्यादा से ज्यादा बीबियों को रखने के लिए किया जाता है..
बुर्का भी फटेगा,
एक नई औरत बाहर आयेगी..
इस्लाम से आजाद,
मुल्लों से मुक्त..
©डॉ. सुनील
शानदार
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