बाबा गुरुमीत राम रहीम ने धर्म के नाम पर जनता को ठगा,
नेता देश के नाम पर जनता को पागल बनाते हैं..
नेता के लिए राजनीति देश सेवा का मार्ग न होकर एक व्यवसाय है जैसे बाबा के लिए धर्म अय्याशी का एक साधन था..
अगर बाबा राम रहीम मुख्यमंत्री होता तो?
उसके भक्त जिसे चाहें वोट देकर सत्ता में बैठा सकते हैं..
तो क्या बाबा के भक्तों से मताधिकार छीन लेना चाहिए?
राजनीति भी तो जातीय गुटों में बँटी हुई है..
यही कारण है कि सरकारें आती हैं और जाती हैं लेकिन जनता के लिए उसके कष्टों में कोई कमी नहीं आती है..
©डॉ. सुनील
जय श्री कृष्ण!
नेता देश के नाम पर जनता को पागल बनाते हैं..
नेता के लिए राजनीति देश सेवा का मार्ग न होकर एक व्यवसाय है जैसे बाबा के लिए धर्म अय्याशी का एक साधन था..
अगर बाबा राम रहीम मुख्यमंत्री होता तो?
उसके भक्त जिसे चाहें वोट देकर सत्ता में बैठा सकते हैं..
तो क्या बाबा के भक्तों से मताधिकार छीन लेना चाहिए?
राजनीति भी तो जातीय गुटों में बँटी हुई है..
यही कारण है कि सरकारें आती हैं और जाती हैं लेकिन जनता के लिए उसके कष्टों में कोई कमी नहीं आती है..
©डॉ. सुनील
जय श्री कृष्ण!
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