सीख लो कुछ अविरल बहती नदी से,
कैसे छोड़ अवसाद, आगे बढ़ती विसर्प बनाकर..
लिखते रहो कहानी अपनी,
परिच्छेद गढ़कर, अनुच्छेद बनाकर ..
★डॉ. सुनील
जय श्री कृष्ण!

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